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दूरियाँ

Posted On 26 Apr, 2017 कविता में

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चलो दूरियां कुछ सिमटा लेते है /
एक दूजे को फिर अपना लेते है /
क्या ठीक, ये जिंदगी रहे ना रहे /
रिश्तों की गर्माहट बढ़ा लेते है /
ना तुम याद रखो, मै भूल जाऊ /
सारे गीले -सिकवे मिटा लेते है /
तुम मैं, और मैं तुम बन जाऊं /
रिश्तों को नया अंजाम देते है /
दूरियां बढ़ ना पाए फिर कभी /
इस बात का हरदम ध्यान देते है /

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
May 17, 2017

“दूरियां” बहुत गहरी और दिल को स्पर्श करने वाली कविता ! ये जिंदगी रहे ना रहे, रिश्तों की गरमराहट बढ़ा देते हैं ! अति सुन्दर लाइनें, शुभकामनाओं के साथ !


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