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कई और बंगलादेश बना देंगे

Posted On 20 Apr, 2017 कविता में

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तुम बार-बार-
हमारी सहनशीलता का -
परीक्षा लेते हो /
जीत जाने पर बुजदिल, और-
हारने पर असहिष्णु /
नाम देते हो /
तुम पत्थर चलाते रहो, और -
हम फूल बरसाते रहें /
ये कैसा तुमने -
शौक पाल रखा है /
सहनशीलता का ठेका
क्या अकेले हमने ही -
सम्भाल रखा है /
एक गाल में थप्पड़ -
जड़ दो तूम तो /
दूसरा हम बढ़ा देंगे /
दोनों गालो को छुआ अगर तो -
जन्नत की राह दिखा देंगे /
फेंक के पत्थर ,
उठा लो तिरंगा /
अपने – अपने हाथ में /
तुम सुरक्षित रह पाओगे /
केवल भारत के साथ में /
तुम्हे आज़ादी पसंद है तो /
हमें भी गुलामी पसंद नहीं /
सिंधियों , बलूचों और ,
गुलाम कश्मीरियों का -
तड़पना अब बर्दास्त नहीं /
सुधर जाओ अब भी -
वरना हम अपना /
एक और रूप दिखा देंगे /
उठा लिए गांडीव हाथों में तो -
कई और बंगलादेश बना देंगे /

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
April 26, 2017

आतंकियों को एक खुला सन्देश ! अति सुन्दर कविता, साधुवाद व् आशीर्वाद हरेंद्र

jlsingh के द्वारा
April 22, 2017

बेहतरीन जज्बात को उभरती समसामयिक कविता आदरणीय राजेश कुमार श्रीवास्तव जी!


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