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शौच का समय Contest

Posted On: 29 Mar, 2017 Contest में

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कुछ साल पहले की घटना है / मैं अपने पैतृक गांव बैकुंठवा एक रिश्तेदार की शादी में सम्मिलित होने आया हुआ था / यह गाँव बिहार प्रदेश के पश्चिम चंपारण जिले में है / यह क्षेत्र काफी पिछड़ा है / मुझे एक सप्ताह यहाँ रुकना था / जून का महीना था / काफी गर्मी पड़ रही थी / सुबह चार बजे ही उजाला दिखने लगता था / छह बजते ही तेज धुप निकल आता / यहाँ के लोग खूब सुबह उठ जाते थे / दिन में काफी गर्मी पड़ती थी / लेकिन जैसे ही रात गहरी हो जाती थोड़ी थोड़ी ठंढी हवा चलने लगती / सुबह होते- होते एक चद्दर की ठंढी लगाने लगती / बिजली के खम्भे तो थे लेकिन उसपर बिजली नदारद थी / रात को गर्मी से नींद नहीं आती और जब सुबह ठंढी हवा बहने पर नींद आती तबतक काफी धुप निकल गई होती / सारे लोग जग गए होते थे / फिर मुझे भी जग जाना पड़ता / फिर शौच के लिए हाथों में लोटा लिए हम किसी झाड़ी की खोज में निकल पड़ते / अभी तक यहाँ शौचागार की व्यवस्था नहीं हो पाई थी / दो -तीन दिन गुजर चुके थे / रोज सुबह साढ़े पाँच और छह बजे के बिच हम शौच के लिए खेतों में निकल जाते / उसी समय और कई लोग भी अपनी अपनी हाथों में लोटा लिए या किसी झाड़ी के पीछे शौच करते दिख जाते / कुछ लोग तो खुले मैदान में भी बैठे मिलते / लेकिन मुझे आश्चर्य होता की इनमे मुझे कोई भी महिला नहीं दिखती / मैं बड़ी दुबिधा में था की महिलाये शौच के लिए कहाँ जाती है / मैंने अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए अपने एक रिस्तेदार से इस बात को पूंछा / पहले तो वो हँसे / फिर उन्होंने जो बताया वह काफी हैरान करने वाला था /
उन्होंने कहा की यहाँ की महिलाये सूरज निकलने के पहले ही अपने नित्यकर्म से निवृत हो लेती है / सूरज निकलने के बाद पुरुष शौच के लिए निकलने लगते है तब यहाँ की महिलाओं को शौच के लिए बाहर निकलना मना होता है /
मैंने उनसे पूछा -” और यदि कभी दिन में उन्हें जरुरत महसूस हुई तो?”
उन्होंने जबाब दिया -” तब वह महिला अपने साथ कुछ महिलाओं को साथ लेकर निकलती है / हाथ में लोटा भी नहीं ले जाती / घर में आकर साफ़ होती है / शौच करते समय बाकि महिलाएं उसकी चरों ओर से निगरानी करती है और जब कोई पुरुष आता दिख जाता है तब वह उसे इशारा कर देती है जिससे शौच करती महिला उठ खड़ी हो जाती है / ”
फिर मैंने पूछ की क्या पुरुषों का भी शौच का समय निर्धारित होता है ?
तो जबाब मिला -” भला पुरुषों को इसकी क्या जरुरत है / वे जब चाहे, जहां चाहे शौच कर सकते है /

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
April 26, 2017

राजेश, मैं उम्र में तुमसे काफी बड़ा हूँ, क्या मैं बेटा शब्द इस्तेमाल कर सकता हूँ ? एक जलता बलता सवाल बड़े नाटकीय और रोमांचकारी शब्दों का इस्तेमाल करके तुमने जागरण जंक्शन के पाठकों तक पहुंचाया, पहली बार और पुरुष्कार पाया, इसके तुम सचमुच में हकदार थे ! बहुत सारी बधाइयां और शुभ कामनाएं ! कभी कभार उड़ती नजर “जागते रहो” पर भी डाल कर लेख की कमी जरूर उजागर कर देना !

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 27, 2017

    चाचा जी प्रणाम / शायद आप मुझे पहचाने नहीं / मैं आपके पोस्टों का नियमित पाठक था / आपके सभी पोस्टों पर कमेंट भी करता था / अपने पोस्टों पार आपका आशीर्वाद भी पाता था / एक लम्बे समय से मैं इस मंच पर अनुपस्थित रहा इसलिए आप मुझे पहचान नहीं पा रहे / मुझे जुड़वे बच्चों का पिता बनने पर अपने मुझे बधाई और बच्चों को आशीर्वाद भी दिया था / अब कुछ दिनों से मंच पर सक्रीय हुआ हूँ / आशा है आपका आशीर्वाद मिलता रहेगा /

Alka के द्वारा
April 7, 2017

आदरणीय राजेश जी , सर्वप्रथम पुरस्कार पाने के लिए आपको हार्दिक बधाई | आपने एक अछूता सा विषय उठाया | पढ़कर मन विचलित सा हो गया |

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 8, 2017

    आभार आपका / आपलोगों का आशीर्वाद मिलता रहे तो मैं अपनी लेखनी से ऐसे मुद्दों को उठाकर उसके समाधान की दिशा में प्रयास करता रहूंगा /

jlsingh के द्वारा
April 6, 2017

आदरणीय राजेश जी, सादर अभिवादन! आपने बातें तो सच ही लिखी है …आज की ज्वलंत समस्या पर प्रकाश भी डाला है. कई साल पहले तक लगभग सभी गांवों की यही समस्या थी पर अब चेतना आयी है.. शौचालय बनाने लगे हैं खासकर महिलाओं के लिए.. गांव में तो यह रिवाज क्लाफी दिनों तक चला की घर का शौच महिलाओं के लिए है पुरुष तो स्वतंत्र परनी है… पुरस्कृत होने के लिए बधाई! सादर!

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 7, 2017

    आभार आपका सिंह जी / जितना जरुरत शौचालय का निर्माण करना है उतना ही इसके प्रयोग का भी है / स्त्री हो या पुरुष सभी को शौचालय के प्रयोग का आदत डालना चाहिए /

Shobha के द्वारा
April 6, 2017

श्री राजेश जी aaj की सबसे बड़ी समस्या शौचालयसे आपने सबको जोड़ दिया पुरूस्कार के लिए मुबारकबाद

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 7, 2017

    शोभा जी प्रणाम और आभार आपका / आपका आशीर्वाद मिलते रहना चाहिए /

sinsera के द्वारा
April 6, 2017

पुरस्कार प्राप्त करने के लिए बधाई स्वीकार करें राजेश जी.हमारा देश चाँद तक सड़क बनाने में सक्षम है लेकिन कितने लोग अभी शौचालय से भी वंचित हैं. विचारणीय मुद्दा.

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 7, 2017

    आभार आपका / शौचालयों का निर्माण और उसका प्रयोग दोनों पर ध्यान देने की जरुरत है / कुछ जगहों पर मैंने देखा है जहाँ सरकारी सहायता से बने शौचालयों का प्रयोग दूसरे कामों के लिए होता है जैसे गोदाम के रूप में / बकरियों या गायों के रखने में / एक शौचालय को तो चाय के दुकान में भी तब्दील होते देखा है /

yamunapathak के द्वारा
April 6, 2017

आदरणीय राजेश जी नमस्कार कांटेस्ट में विजेता बनने पर यमुना की हार्दिक बधाई स्वीकार करें .यह भेदभाव सच में महिलाओं को झेलना पड़ता है.आज भी कई स्थान ऐसे हैं .एक ज्वलंत मुद्दे पर प्रकाश डालने का अतिशय आभार . साभार

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 7, 2017

    यमुना जी धन्यवाद / आपको भी बधाई /

sadguruji के द्वारा
April 6, 2017

आदरणीय राजेश कुमार श्रीवास्तव जी ! बहुत अच्छी रचना ! प्रतियोगिता में पुरस्कृत होने पर बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई !

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    April 7, 2017

    सद्गुरु जी आपका आशीर्वाद पाकर मै धन्य हो गया /

sinsera के द्वारा
March 29, 2017

उफ़..


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