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पश्चिम बंगाल में धर्मनिरपेक्षता ????????

Posted On: 31 Oct, 2015 Others में

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केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही बुद्धजीवियों को भारत की धर्मनिरपेक्षता खतरे में दिखलाई पड़ने लगती है / उन्हें लगता है कि हमारी सामाजिक समरसता के लिए केवल और केवल भारतीय जनता पार्टी ही खतरा है / सरकार क़ी आलोचना , धरना प्रदर्शन से लेकर पुरुष्कार लौटाने तक की याद इन बुद्धजीवियों को केवल बी. जे. पी. क़ी सरकार होने पर ही आती है / इसमें पश्चिम बंगाल के बुद्धजीवी बढ़-चढ़ के भाग लेते है / लेकिन वही बुद्धजीवी पश्चिम बंगाल में हाशिये पर पड़ा लोकतंत्र और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण पर मौन साध लेते है / चाहे बामपंथी सरकार हो या ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रहा माँ, माटी, मानुस क़ी सरकार, सभी ने लोकतंत्र को बंधक बना कर रखा है / वोट बैंक खातिर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए इनमे प्रतिस्पर्धा बनी रहती है / युवाओं को यह कहकर बरगलाया जाता है कि पश्चिम बंगाल बुद्धजीवियों का प्रदेश है / यहाँ धर्म कि बात करना संकीर्णता है / लोकतंत्र कि स्थापना के लिए संघर्ष करना बगावत है / ३४ वर्ष तक चली बामपंथी सरकार ने यहाँ कि जनमानस क़ी बौद्धिकता को गुलाम बना लिया है / अब जिसका जमकर फायदा माँ, माटी मानुस की सरकार ले रही है /
बंगलादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन की उक्ति जिसमे उन्होंने कहा है कि भारत में हिन्दू विरोध ही धर्मनिरपेक्षता है यहाँ सौ प्रतिशत सही ठहरती है / कुछ ताजे उदहारण इसके प्रमाण है / बिगत तीन वर्षो से बीरभूम जिला के नलहाटी के एक गाँव में दुर्गा पूजा कि अनुमति नहीं है / मुर्शिदाबाद , बीरभूम सहित कुछ जिलो में विद्यालयों में सरस्वती पूजा नहीं करने दिया जाता / पश्चिम बंगाल में निर्धारित तिथि पर दुर्गा विसर्जन कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योकि उसदिन मुहर्रम भी था/ कलकत्ते के विश्व प्रसिद्द दुर्गा पूजा उत्सव में बहुप्रचारित विश्वप्रिय पार्क कि विश्व कि सबसे बड़ी दुर्गा प्रतिमा को भीड़ का बहाना बनाकर कपडे से ढक दिया गया/ इसे देखने कि अनुमति नहीं दी गई / पिछले महीने कार्पोरेशन चुनाव में हुए धांधली को कैमरे में रिकॉर्डिंग होने के बावजूद दोषियों के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया गया / लेकिन यहाँ के कथित बुद्धजीवी या तो चुप थे या फिर विरोध कि खाना- पूर्ति कर के बैठ गए / किसी ने पुरस्कार लौटाना तो दूर सरकार के विरुद्ध एक शब्द भी बोलना गंवारा नहीं समझा / यहाँ के बामपंथियों को बिना मूछों के दाढ़ी रखना तो ठीक लगता है लेकिन माथे पर तिलक लगाना आपत्तिजनक / धार्मिक उत्सवों में हिस्से ना लेने वाले बीफ उत्सव करते फिरते है / जहाँ कही भी अल्पसंख्यकों कि संख्या ३०% से ज्यादा है वहाँ क़ी राजनीती से लेकर प्रसाशन तक सबमे इन्ही की चलती है / यहाँ के बहुसंखयक नेताओं को बीफ उत्सवों में बढ़-चढ़कर हिस्से लेकर गोमांस खाते देखा जाता है लेकिन किसी अल्प्संखयक नेता को सूअर का मांस खाते नहीं देखा जाता / बहुसंख्यक यहाँ दोयम दर्जे के नागरिक बनकर रह जाते है / इस समस्या पर यदि समय रहते नहीं ध्यान दिया जाय तो पश्चिम बंगाल को भी बंगलादेश बनते देरी नहीं लगेगी /
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सडकों पर बीफ utasaw मनाते बुद्धजीवी

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दुर्गा प्रतिमा को बुर्का पहनाया गया /

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हिन्दू प्रधान गांव में दुर्गा पूजा की अनुमति नहीं /

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
October 31, 2015

जय श्री राम बहुत मर्मस्पर्शी लेख ये देश का दुर्भाग्य है की दादरी की घटना को २१ दिन तक दिखया गया जबकि ममता की या केरल की मुस्लिम तुस्टीकरण नीति में मीडिया चुप मीडिया का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी/हिन्दू विरोधी है.आज सरदारजी की बहुत याद आ रही राजेशजी सटीक लेख के लिए बधाई

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    November 1, 2015

    ha agarwal ji / apne thik kaha / aabhar apkaa /


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