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धर्म बड़ा या देश (शिक्षाप्रद कहानी -१)

Posted On: 2 Feb, 2015 Others में

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एक राजा था / उसके नेतृत्व में राज्य सुरक्षित, खुशहाल और धन-धान्य से परिपूर्ण था / पडोशी राज्यों के राजा इस राज्य की खुशहाली देखकर ईर्ष्या करते थे / वे हमेशा इस ताक में रहते कि कोई मौक़ा मिले और इस राज्य पर चढ़ाई की जाय / लेकिन वे साहस नहीं कर पाते / राजा स्वयं सैनिक का भेष धारण कर सीमाओं की सुरक्षा का जायजा लिया करते थे / राजा को अपनों के बीच पाकर सैनिक भी उत्साहित होकर पुरे मुस्तैदी से सीमा की रखवाली करते / प्रजा भी खुद को सुरक्षित समझकर मेहनत और लगन से अपना काम करते / राज्य दिन पर दिन उन्नति के शिखर पर चढ़ते जा रहा था /
एक दिन कही से एक सन्यासी पधारे / उन्होंने राजा से राजमहल में धार्मिक प्रवचन करने की अनुमति मांगी / राजा ने अनुमति दे दी / एक सप्ताह तक राजमहल में प्रवचन और पूजा-पाठ का कार्यक्रम चलता रहा / राजा अपने पुरे परिवार और मंत्रिमंडल के साथ पुरे मनोयोग से इस कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिए / सन्यासी के प्रवचनों का राजा पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा की वे पुरे धार्मिक प्रवृति के हो गए / राज काज के कामों से अधिक वे पूजा-पाठ, प्रवचन, यज्ञ को प्राथमिकता देने लगे / मंत्री ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि इस तरह से धार्मिक क्रिया कलापों में ज्यादा समय देने पर राज-काज प्रभावित होगा/ लेकिन राजा ने उनकी एक ना सुनी / राजा ने मंत्री को सन्यासी का एक मन्त्र सुनाया जिसमे कहा गया था की “धर्मों रक्षित रक्षतः” अर्थात जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है / अब राजा सीमाओं के जायजा लेने की बजाय धार्मिक क्रिया कलापों में ज्यादा वक्त गुजरने लगे / नवरात्र का समय था वे खुद नौ दिनों तक उपवास रहने का निश्चय किये और सभी राज्याश्रित कर्मचारियिों को भी उपवास रहने का आदेश जारी कर दिए / उनके आदेश का पालन हुआ और नौरात्र में सभी मंत्री, कर्मचारी, सिपाही, सैनिक नौरात्र का व्रत उपवास रहकर करने लगे / अभी चार -पांच दिन ही बीते थे की सभी की हालत उपवास रहने के कारण ख़राब होने लगी / सभी सैनिक कमजोर हो गए / राजा भी कमजोरी के चलते राजमहल के बाहर निकालना बंद कर दिए / मंत्री भी अपना काम नहीं कर पा रहे थे / सैनिक सीमाओं की निगरानी की जगह दुर्गा जागरण में लगे रहे / मौक़ा का फायदा उठाकर पडोशी राज्य के राजा ने आक्रमण कर दिया और राजा सहित सभी मंत्रिओं को बंदी बना लिया / राजा और उनके मंत्रिओं पर धर्म – परिवर्तन का दबाव डाला गया / राजा ने राज्य में खून खराबे के डर से धर्म परिवर्तन स्वीकार कर अपनी गद्दी पडोशी राजा के हाथों में सौप दी / इस तरह से वे अपनी धर्म और सत्ता दोनों से हाथ धो बैठे /

शिक्षा : जिस देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं वहाँ धर्म क्या कुछ भी सुरक्षित नहीं रह सकता /

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
February 3, 2015

जिस देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं वहाँ धर्म क्या कुछ भी सुरक्षित नहीं रह सकता – sach likha hai aapne .aabhar


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