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सिर्फ कैलेण्डर का पन्ना बदल जाता है /

Posted On: 31 Dec, 2014 Others में

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Happy-New-Year
ना सूरज बदलता है /
ना चाँद बदल पाता है /
धरती का एक -एक कोना -
पहले सा ही रह जाता है /
सिंह दहाड़ता है/
बकरी मिमियाती है /
हर साँझ के बाद -
आदमी रात को ही पाता है /
दिसंबर का आखिरी दिन -
जैस हि गुजर जाता है /
नए साल की नई सुबह-
सिर्फ कैलेण्डर का पन्ना बदल जाता है /
लेकिन-
मानव चाहे तो -
क्या नहीं कर पायेगा /
ठान ले करने को कुछ तो-
आसमाँ को भी झुकाएगा /
चलो इस नए साल में -
कुछ नया करने की जिद कर डाले /
मरकर स्वर्ग पाने की -
चाहत बदल डाले -
नई सोच, नई ऊर्जा, दृढ विश्वास -
स्वर्ग को हीं धरती पर -
उतरने को मजबूर कर डाले /

अंग्रेजी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये /

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 3, 2015

मरकर स्वर्ग पाने की – चाहत बदल डाले – नई सोच, नई ऊर्जा, दृढ विश्वास – स्वर्ग को हीं धरती पर – उतरने को मजबूर कर डाले / वाह वाह क्या बात कही है राजेश जी! नए वर्ष की हार्दिक शुकमनाएं!

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    January 5, 2015

    सिंह जी धन्यवाद / नववर्ष की मंगल शुभकामना /

pkdubey के द्वारा
January 2, 2015

सिंह दहाड़ता है/ बकरी मिमियाती है / सही कहा भाईसाहब |सादर आभार | हैप्पी न्यू ईयर.

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    January 2, 2015

    दुबे जी आभार आपका / नया वर्ष मंगलमय हो /

meenakshi के द्वारा
January 1, 2015

वाकई देखा जाय तो सब कुछ वही रहता है पर फिर भी नया साल आ जाता है . बहुत सहज लिखा .नव वर्ष की मंगल कामनायें ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    January 2, 2015

    मिनाक्षी जी प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद / नव -वर्ष की मंगल शुभकामनाये /

sadguruji के द्वारा
December 31, 2014

बहुत सुन्दर और प्रेरक कविता ! बहुत बहुत बधाई ! आपको और आपके समस्त परिवार को नववर्ष की बहुत बहुत बधाई ! आपकी सुन्दर और सार्थक लेखनी नववर्ष में भी यूँ ही चलती रहे !

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    January 2, 2015

    सद्गुरु जी आपकाए आशीर्वाद मिला ख़ुशी हुई / अंग्रेजी नव वर्ष की शुभकामनाएं /

yamunapathak के द्वारा
December 31, 2014

ज़ीनत थी जिस कैलेंडर से घर में एक साल ही रह कर वह भी उतर गया जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है फिर भी नए पुराने का बोध हम में ऊर्जा का संचार करता है यह मन ही है जो बिना हवा के ही पत्तियों की सरसराहट को महसूस करता है और भरी बरसात में भी प्यासा रह जाता है . सब कुछ वही है सदियों से पर हमारा मन कहाँ वही रह पाता है .ज़रूरी है की जीवन में कुछ उत्सव हों ताकि लोग एक दूसरे से मिलें अपनी बात कहें .कभी कभी सिर्फ कहने सुनने से भी बहुत कुछ सरल हो जाता है .एक अच्छी कविता के लिए बधाई नव वर्ष सब के लिए मंगल मय हो

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    January 2, 2015

    यमुना जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद / आगे भी सहयोग बनाये रखियेगा /


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