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इनकार (लघु कथा)

Posted On: 11 Dec, 2014 Others में

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“सुरेश जी आप तो कल अपनी बेटी के लिए लड़का देखने गए थे ना ?”
“हाँ , गया था /”
“कैसा है लड़का ?”
“लड़का गोरा-चिट्टा, ६ फुट लम्बा, उभरा मस्तिस्क , मजबूत शरीर, किसी राजकुमार से कम नहीं लगता / मेरी बेटी की तुलना में तो बीस पड़ता है /”
“करता क्या है ?”
“केंद्रीय ऊर्जा आयोग में अधिकारी के पद पर है /”
“तब तो वेतन भी अच्छा -खाशा होगा / उपरवार भी कमा लेता होगा /”
“उपरवार का तो नहीं पता लेकिन वेतन अच्छा – खासा है /”
“परिवार कैसा है ?”
“घर में माँ -बाप और बेटा सिर्फ तीन लोग ही है / बाप राज्य सरकार में कर्मचारी थे / अब रिटायर्ड हो गए है / अच्छा -खासा पेंसन पाते है / माँ घर में ही रहती है / अपना एक बड़ा सा मकान भी है / निचे के कमरों को उनलोगों ने किराये पर दे रखा है /”
” मांग कितना का है /”
” कोई खास नहीं /’
“तब तो बड़ा अच्छा रिश्ता पाया है आपने / जल्द से सगाई कर दीजिये / शादी बाद में होती रहेगी /”
“मैं भी तो यही चाहता हूँ / लेकिन——”
“लेकिन क्या ?”
“मेरी बेटी ने ऐसे परिवार में शादी से इंकार कर दिया है /”
वो भला क्यों?
अकेला लड़का है वो भी अपने माँ -बाप के साथ रहता है / मेरी बेटी को भी अपने सास-ससुर के साथ रहना होगा / उनकी गुलामी करनी होगी / उनके पुराने संस्कार को मानने होंगे / और तुम तो जानते हो की मेरी बेटी किसी के अधीन नहीं रह सकती / संस्कार के नाम पर उसके पंखों को उड़ने से नहीं रोका जा सकता / इसलिए इंकार कर दिया है /

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ravindersingh के द्वारा
January 24, 2015

ACHHI  LAGHU KATHA  …..JAWAHAR  LAL SINGH SE  भी सहमत — BADHAI श्रीवास्तव जी

jlsingh के द्वारा
December 13, 2014

अच्छी लघुकथा…आजकल के सन्दर्भ में….पर ऐसी परिस्थिति में भी कुछ परिवार अपने माता पिता से अलग होकर ही रहते हैं…

    Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
    December 14, 2014

    धन्यवाद सिंह जी /


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